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Thursday, November 17, 2011

आज भी प्यार है तुझे ..


मै जनता हु आज भी प्यार  है तुझे ..
   मेरे हर एहसास ,
                      आज भी यद् होंगे तुझे|
मेरी हर बात,
                      याद जरुर आती होगी तुझे|
वो लड़ना झगड़ना ,
                       रूठना,मानना याद होगा तुझे|
लाख करले तू बहाने खुश रहने के.........
                         पर अकेले मे आंशू तो बहते होंगे तेरे|
मेरे दूर जाने  पर भी,
                         मेरे लौटने का इन्तजार तो होगा तुझे|
जब इतना प्यार था,
                         तो छोड़ा क्यों  मुझे|
तू मुझे छोड़ गई,
                     मुझसे मेरी जिन्दगी रुठ गई|
अब लौट कर आकर
                      मनाऊ तो मनाऊ कैसे तुझे|



                    रचनाकार--प्रदीप तिवारी
                                                          www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
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Monday, November 14, 2011

जीवन पथ

मुस्कुराहटो को हमने अपना बना लिया|
गमो को हमने सीने मई छुपा लिया|                  
ज़माने वाले तो हमें यू ही मार देते,
तो हमने मौत को ही अपना हमसफ़र बना लिया|


रचनाकार --प्रदीप तिवारी
www.pradeeptiwari.blogspot.com

मेरी तन्हाई



ज़माने भर की महफ़िल वीरान लगी, 
बस तू ही मुझे सबसे खास लगी|            
 हर अपना बेगाना होने लगा ,
 बस तू ही मेरे सबसे पास लगी|
 हर जख्म हरा करने को दिल चाहा,
 इन जख्मो मे तेरी याद  बसी|
 हम जानते थे अंजामे मोहब्बत का,
 फिर भी क्यों मुझे  तू मेरी जान लगी|
  जानता था तेरी बेवफाई न जाने कब से,
पर जानते हुए भी क्यों तुझसे ही  वफ़ा की आस  लगी|


रचनाकार --प्रदीप तिवारी
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com

Sunday, October 30, 2011

मेरी किस्मत

उन्हें याद आया जब वाफाओ का फशाना मेरा ,
वे तड़प तड़प कर बेतहाशा पछताए|                     
वो अपने गुनाहों की माफी मागने घर मेरे आये|
मेरे घर वालो ने मेरा नया पता दिया उनको |             
वो दौड़ते दौड़ते हमसे मिलने वहा भी  वो आये|
दहलीज पर मेरे खूब आवाज लगाईं उन्होंने,
आशुओं से भिगोया भी जी भर कर मुझको|
पर हम तो ऐसा सोये अपनी कब्र पर 
की जाग भी न पाए उनकी इस दस्तक पर.

रचनाकार --प्रदीप तिवारी
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com

मै और मेरी वफ़ा


तुने मुझे बेवफा कहा,ये भी मुझे मंजूर है,
तेरी जिन्दगी मुझसे नहीं कही तो जरुर है|      
हमने अपनी वफ़ा को बेवफा नाम दे दिया,
क्यू की तेरी किस्मत का सितारा कोई और है|
तेरी राहों  में  फूल  बिछाते  रहे हम,                 
गमो को छुपाकर हसते रहे हम|
मेरे अंधेरो का साया न मिले तुझे ,
तेरी रोशनी के लिए जलते रहे हम|
वफादारी वो भी न करता तेरे लिए ,
जो बेवफा बनकर करते रहे हम|
जिस मंजिल मे बैठकर तुम इतरा रहे हो आज ,
उस मंजिल की सीढी बनाते रहे हम|
तेरे पल पल मुस्कराहट की चाहत मे,
तिल तिल कर मरते रहे हम|  








रचनाकार --प्रदीप तिवारी
www.pradeeptiwari.blogspot.com

Tuesday, October 11, 2011

परिवर्तन

जमाने को अपने हालात क्या बतलाते,
हम अपनों को दिए जख्म सिल रहे है|
         जज्बातों की आँधी कब की सांत हो चुकी '
        अब तो  हम  बस अपनों से लड़ रहे है|
जिन्दगी दी थी अपनों को कभी'
वही मेरे  मौत पर हस रहे है|
       अपनों को रखा था हमेसा  करीब
       क्यों वो  अब पराये से  लग रहे है|
मौत तो कब की हो चुकी है मेरी,
फिर क्यों  मरे प्राण अटके पड़े है|
         कब्र खोदी थी  खुद ही मैंने अपनी,
        फिर क्यों दफ़न होने से डर रहे है|

रचनाकार--प्रदीप तिवारी 
www.pradeeptiwari.blogspot.com
pradeeptiwari.mca@gmail.com

यादे

तेरे  जाने के बाद तेरी पहचान  अभी बाकी  है|
मुर्दा है जिस्म पर जान अभी बाकी  है|
खुदा ने नवाजा है तुझे  उस नूर से की,
उजड़ गया है चमन पर खुसबू अभी बाकी है|
  तूने  जमाना छोड़ दिया तो क्या हुआ,
इस ज़माने में तेरी  याद  अभी बाकि है |

रचनाकार --प्रदीप तिवारी 
www.pradeeptiwari.blogspot.com
pradeeptiwari.mca@gmail.com