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Saturday, July 14, 2012
Wednesday, April 25, 2012
जिन्दगी को समझाना,
अब मुस्किल सा लगता है ।
अकेला होता हु जब भी मै,
तब मुझे महफ़िल सा लगता है।
महफ़िलो मे होता हु जब भी मै,
तभी सूनसान सा लगता है।
एक पल जो अपना सा लगा था कभी ,
अब वही मुझे पराया सा लगता है।
जो कही बहुत दूर है मुझसे ,
वही मुझे अपना सा लगता है।
जब भी हसने को दिल चाहता है ,
तभी मेरा मन उदासा सा लगता है।
कभी मौत से तार्रुफ़ होता है तो,
लगता है अभी तो जीना बाकि है।
जब जीने की चाह होती है,
तब मौत में कुछ खास सा लगता है।
दोस्तों न जाने क्यु मेरा मन
आजकल बहुत उदास सा लगता है....
रचनाकार =प्रदीप तिवारी
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
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Tuesday, March 13, 2012
माँ
भुला दिया उसने उसी को.
जिन्दगी को नई जिन्दगी दी जिशने .
जीवन तक लगा दिया उसे लाने मे.
फिर भी भूल गया तू किसी और के आने से.
हर तरफ सिर्फ खुसिया दी जिशने .
फिर गम क्यों है उसके आशियाने मे.
मरहम बना दिया खुद को जिशने
फिर दर्द इतना क्यों उसके सीने मे.
दर्द को हरा कर खुसी दी जिशने
फिर खुसी क्यों नहीं उसके नसीब मे.
प्रदीप कहता है माँ का जीवन है सायद ऐसा
वरना माँ तो बनाती है सपूत उसे
पर होते न कपूत इस जहांन मे ..
रचनाकार...प्रदीप तिवारी
Tuesday, March 6, 2012
होली की सुभकामनाये
अबकी होली ऐसे रंगों..
मन प्रीत से रंग जाये.
रहे न एको मन मे बैर..
बस प्रेम मिलन हो जाये..
रंगों तन को ऐसे की
मन भी रंगा रंग हो जाये..
धुले भले ही तन से रंग..
पर प्रीत बसी रह जाये...
खो के भाई चारे मे....
साद एक दूजे के हो जाये..
छूटे चाहे जग सारा..
पर प्रीत न छूटने पाए..
रचनाकार --प्रदीप तिवारी
.kavipradeeptiwari.blogspot.com
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Thursday, March 1, 2012
mohbbat?????
jindgi bhar tanha rahe kyo ki kisi aur ka sath manjoor na tha...
kawahiso ko hi mar diya hamne kau ki unme tera na noor tha...
jindgi ke rasto ko mod diya teri khushiya ki taraf..
kau ki meri jindgi ko teri kushi ke alwa kuchha aur na manjoor tha...
dilo halat ko batlana to tughe jarur tha.....
par rok liya khud ke jajabato ko ..kau ki tri jindgi mai koi aur tha........rachanakar..pradeep tiwari
kavipradeeptiwari.blogspot.com
kawahiso ko hi mar diya hamne kau ki unme tera na noor tha...
jindgi ke rasto ko mod diya teri khushiya ki taraf..
kau ki meri jindgi ko teri kushi ke alwa kuchha aur na manjoor tha...
dilo halat ko batlana to tughe jarur tha.....
par rok liya khud ke jajabato ko ..kau ki tri jindgi mai koi aur tha........rachanakar..pradeep tiwari
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Tuesday, February 21, 2012
Wednesday, February 1, 2012
इबादत
मोहब्बत को खुदा मानकर,
बिताया हर पल उसकी इबाबद में।
हर जुल्मो हालात को,
हस हस कर सहा उसकी चाहत में।
की खुदा मिला देगा मुझे,
उससे हर हाल में।
पर दुआ कबूल न की ,
न जाने क्यू मेरे भगवान ने।
रूठा कर खुदा से कहा मैंने,
कमी क्या थी मेरी तेरी इबादत मे।
उसने मुश्कुराकर कहा मुझसे ..
यू मिल सकता अगर मीत चाहने से
तो बिछड़ते न कान्हा राधा के प्यार मे।।
रचनाकार --प्रदीप तिवारी
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
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