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Monday, October 21, 2013

खुद को कर, रोशन इतना ,
की सारा जग, चमक जाये ।
सूरज जो आये , मुडेर  पर तेरी ,
वो भी देख , तुझे दहक  जाये ।
तू असीम है, असीमित है ,
बस खुद पर ,विस्वाश कर ।
जग तेरा ,यश गान करेगा,
बस निस्वार्थ हो, तू कार्य  कर ।


रचनाकार
प्रदीप तिवारी 
9584533161

Thursday, March 7, 2013

8



धैर्य साहस विस्वाश की मूर्ति है ,
जीवन में खुशियों  की पूर्ती है
इसके बिना जीवन संभव नहीं
ये माँ ,बहन ,पत्नी रूप की प्रतिमूर्ती है
ऐसी महान अनुक्रती को ,
महिला दिवस के शुभ  अवशर  पर
 प्रदीप की  बारम्बार नमन और स्तुती  है ।

रचनाकार -प्रदीप तिवारी
                                                     

Monday, January 28, 2013




हजारो ख्वाहिसे पल रही थी मेरे सीने में ,

पर तुझे पाने के बाद कोई आरजू ही न रही ।



प्रदीप तिवारी 

Sunday, January 27, 2013

तेरे बिन  लग रहा था मर ही जाऊंगा मै ,
पर तेरे जाते ही जीने का मजा आ गया ।।
                                                            प्रदीप तिवारी 

Monday, December 31, 2012


नववर्ष लाये खुसिया अपार ,जीवन में  हो उन्नति अपरम्पार,
कभी न हो गमो से सामना आपका,माँ लक्ष्मी करती रहे आपको दुलार ।

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये
(प्रदीप तिवारी )

Sunday, December 30, 2012


""""""""""" सहादत """"""""""""""""""""""""""""""
मेरा मौन भी अब जोर जो से कहने लगा है।
मेरी खामोसी को अब जहा समझने  लगा है।
तभी तो खड़े है लोग मेरे जाने के बाद भी ,
जानते हुए भी की  मेरा आना अब  मुमकिन नहीं ।
फिर भी न जाने ये युवा  जिद पर  क्यों अडा  है 
 ये अजीब  करवा है जो एक ओर ही चल पड़ा है।।।
करना हमें ही पड़ेगा ,लड़ना हमें ही पड़ेगा ,
अब सायद युवा भी अब ये समझाने लगा है ।।।
मेरी सहादत व्यर्थ नहीं गई ये देखकर ,
मेरी रूह को सुकून बड़ा है ,रूह को सुकून बड़ा है 
 रचनाकार --प्रदीप तिवारी 

Saturday, December 29, 2012

दामिनी के लिए दो शब्द



जिन्दगी को जीना अब उसे बोझ लगने लगा होगा \  
मरहम ही  अब उसे  चोट लगने लगा होगा ।
सोचा होगा उसने ,यहाँ बहुत राजनीती है मेरे जिन्दा रहने  में 
जिन्दगी से ही उसका भरोषा उठने लगा होगा  
छोड़ दिया होगा उसने  जिन्दगी की राह में चलना उसने  
उसको खुद का  जिन्दा रहने से ज्यादा खामोश रहना ही सही लगा होगा ,,,

रचनाकार -प्रदीप तिवारी