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Monday, October 21, 2013
Thursday, March 7, 2013
Monday, January 28, 2013
हजारो ख्वाहिसे पल रही थी मेरे सीने में ,
पर तुझे पाने के बाद कोई आरजू ही न रही ।
प्रदीप तिवारी
Sunday, January 27, 2013
तेरे बिन लग रहा था मर ही जाऊंगा मै ,
पर तेरे जाते ही जीने का मजा आ गया ।।
प्रदीप तिवारी
पर तेरे जाते ही जीने का मजा आ गया ।।
प्रदीप तिवारी
Monday, December 31, 2012
Sunday, December 30, 2012
""""""""""" सहादत """"""""""""""""""""""""""""""
मेरा मौन भी अब जोर जो से कहने लगा है।
मेरी खामोसी को अब जहा समझने लगा है।
तभी तो खड़े है लोग मेरे जाने के बाद भी ,
जानते हुए भी की मेरा आना अब मुमकिन नहीं ।
फिर भी न जाने ये युवा जिद पर क्यों अडा है
ये अजीब करवा है जो एक ओर ही चल पड़ा है।।।
करना हमें ही पड़ेगा ,लड़ना हमें ही पड़ेगा ,
अब सायद युवा भी अब ये समझाने लगा है ।।।
मेरी सहादत व्यर्थ नहीं गई ये देखकर ,
मेरी रूह को सुकून बड़ा है ,रूह को सुकून बड़ा है
रचनाकार --प्रदीप तिवारी
Saturday, December 29, 2012
दामिनी के लिए दो शब्द
जिन्दगी को जीना अब उसे बोझ लगने लगा होगा \
मरहम ही अब उसे चोट लगने लगा होगा ।
सोचा होगा उसने ,यहाँ बहुत राजनीती है मेरे जिन्दा रहने में
जिन्दगी से ही उसका भरोषा उठने लगा होगा
छोड़ दिया होगा उसने जिन्दगी की राह में चलना उसने
उसको खुद का जिन्दा रहने से ज्यादा खामोश रहना ही सही लगा होगा ,,,
रचनाकार -प्रदीप तिवारी
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